नौ साल बाद साध्वी प्रज्ञा की रिहाई का रास्ता साफ

महाराष्ट्र

राज्य ब्यूरो, मुंबई। मालेगांव विस्फोट कांड की आरोपी साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को बांबे हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। इसके चलते नौ साल बाद साध्वी प्रज्ञा की रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। लेकिन इस मामले में सहआरोपी लेफ्टीनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित की जमानत अर्जी ठुकरा दी गई है।बांबे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रंजीत मोरे एवं शालिनी फनसाल्कर जोशी की खंडपीठ ने मंगलवार को अपने 78 पेज के आदेश में कहा कि 44 वर्षीय साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर एक ऐसी महिला हैं जो वर्ष 2008 से जेल में है और कैंसर से पीडि़त हैं।

 याचिकाकर्ता प्रज्ञा को पांच लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाए। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट एनआइए के समक्ष सरेंडर करना होगा। खंडपीठ ने साध्वी को निर्देश दिया कि वह सुबूतों से छेड़छाड़ न करें और जब व जैसे कहा जाए एनआइए की कोर्ट में पेश हों। लेकिन हाईकोर्ट ने प्रसाद पुरोहित की याचिका खारिज कर दी। खंडपीठ ने कहा कि पुरोहित के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया सही मानने के ठोस आधार हैं। खंडपीठ साध्वी एवं प्रसाद पुरोहित की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। न्यायमूर्ति मोरे ने कहा कि साध्वी के खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है।

 इसी हफ्ते छूटेंगी प्रज्ञा

साध्वी प्रज्ञा के वकील ने बताया कि उन्होंने पांच लाख की जमानत राशि के इंतजाम के लिए कोर्ट से एक माह का समय मांगा, जो कोर्ट ने दे दिया। संभवत: साध्वी एक हफ्ते में जमानत पर छूट जाएंगी।


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